पहाड़ों में बियर की बात सुनता हूँ तो याद आता है, पिछले साल बारिश में पुरानी दुकानदारी से बची हुई बोतल लाया था — न खुली थी, न पी गई। कोई बड़ा कारोबार नहीं है यहाँ, बस मोटर मार्ग पर एक दुकान पर कभी-कभार मिल जाती है। मैं तो कहता हूँ, इसे आसानी से आने दो, कमेटी से नहीं, बल्कि बाज़ार तय करे कि चलेगी या नहीं। पर हाँ, पहले देख लेना चाहिए कि किसी की जेब पर या पहाड़ के पानी पर बोझ तो नहीं पड़ता।
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